……मेरा फितूर

…….


मैंने तुम्हें जब जब दिल से पुकारा है
तुम्हें आवाज दिया है
मेरी आवाज मेरी पुकार तुम तक
कभी नहीं पहुचीं
मेरे दिल के तार शायद
तुम्हारे दिल के तार से कभी जुड़े ही नहीं
पहले खुद को फुसला लेती थी
यह कह कर की छत की मुड़ेरे पर बैठ
मैं चाँद से सारी बातें जो कहतीं हूँ
वो तुम तक पहुँच जाती होगी
तब जब तुम भी चाँद के साथ बैठ
गपशप करते होगे
पर अब मेरा वहम-मेरा फितूर राख हो गया
क्योंकि,,,,,
क्योंकि चाँद अब अपनी चाँदनी संग
कोहरे के पीछे जा छुपा है
अब तुम्हें कौन कहता होगा
मेरी पागलपन की हरकतें
अब आईना साफ हो गया है
हमारे बीच कोई तरंग नहीं
जो संदेशा पहुचा सके हमारा….!!!!!

#ziddynidhi

….यदि कोई रात नसीब हुई…

……

यदि कोई रात हमारी नसीब में आई तो मुझे इतना तो यकीन है की हम रात भर जग बातें ही करेगें,, परन्तु हम सबकी बात करेंगे पर हम दोनों की बात नहीं करेंगे हम बस उतना ही एक दुसरे की बात करेंगे जितना की हम खुद से ही बतायेंगे, हो भी तो यह भी सकता है कि बात करते करते मैं तुम्हारे बिलकुल समीप आ सो जाऊँ होने को तो यह भी हो सकता है कि तुम मुझे सुनते सुनते मेरी गोद पर आराम करो पर इतना तो तय है की हमारे मन में कहीं भी परिणय नहीं होगा,हम जो भी कहेंगे या सुनेगें हम सिर्फ यही महसूस करेंगे की हमारी आत्मा ही हमारे सामने निकल कर बैठी हो बुदबुदा रही है,हम अपनी पिछली बातें तो नहीं करेंगे पर हाँ हम पिछली बहुत सी बाते करेंगे,, हम जो भी पल बितायेगें उस रात हम अगली सुबह भूल जायेगें ठीक वैसे ही जैसे रात को हम अपने द्वारा खुद से कही हुई बातों को भूल जाते हैं क्योंकि,,,,,क्योंकि हमारे बीच कोई परिणय नहीं है, एक दूसरे से बात करने का मतलब ही यही है कि हम अपने आप ही बात कर रहें हैं, मुझे इतना तो यकीन है की कुछ ऐसा ही होगा……!!!!!

#ziddynidhi

…..पहला इश्क़….

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हाँ यकीनन इश्क़ एक बार नहीं होता होगा
बार_बार भी हो सकता है किसी को
बचपन की नादानियां कह बात टाली जा सकती है, गलत शख्स से हुआ यह भी कहा जा सकता है, गलत वक्त हुआ ये भी मान सकते हैं
वो इश्क़ नहीं महज आकर्षण है कह कर भूलाने की कोशिश भी किया जा सकता है…… वो केवल मेरी एक अच्छी दोस्त थी कह कर खुद को समझाया भी जा सकता है….पर पहली दफा इश्क़ में जो महसूस होता है ना वो बाद में जब आपके सच्चा वाला इश्क़ होता है ना तब भी वह महसूस नहीं होता,वो उतावलापन,वो एक झलक देखने की ललक वो एक बात करने के बहाने ढूंढना,वो उसकी ओर चुपके से देखना…गलती से उसका नाम आपके होठों से निकलना हर बात में उसकी जिक्र करना…ये सब कुछ होता है पर उस एहसास के साथ नहीं जो पहले इश्क़ पर हुआ था,,,क्योंकि वो पहला एहसास होता है आपके दिल का जो उठते हैं आपके दिल में…हाँ बाद में उसे आप बचकानी हरकत समझ, आकर्षण समझ, गलती समझ भूलना चाहोगे पर जैसे जब आप कोई पौधा अपने आंगन में रोपतें हैं तो जब वो अपनी पहली कली को जन्म देता है जो खुशी जो एहसास उस पहली कली के दिखने में होता है वो एहसास वो खुशी उसके बाद के निकलने वाली कली से नहीं होता है….जबकि बाद में वो पौधा और घनी कली को जन्म देती है फिर भी…उसी तरह ये पहला इश्क़ भी होता है……!!!

#ziddynidhi

….. घुटन…

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कभी कभी घुटन सी होती है हमारी सांसों में जबकि कोई फंदा नहीं होता हमारी गर्दन पर और ना ही कोई धुआं होता हमारे ईर्दगिर्द फिर भी घुटन होता है, ये घुटन होतें हैं अदृश्य जो बने होते हैं रिश्तो के जालों से, रिश्ता कोई भी हो जायज़_नाजायज जब ये अदृश्य घुटन खुदमें महसूस होने लगे तब उन रिश्तो को त्याग देना चाहिए ठीक उसी तरह जैसे किसी वृक्ष पर लगे फल को वृक्ष को जब बोझ लगने लगता है वह बिना किसी मोह के उन्हें स्वयं से अलग कर देता है वह वृक्ष भूल जाता है कि कैसे उसने उस फल को छोटे से पाला था उसने उसे अपने सामने बढ़ते हुए देखा था पर फिर भी वह उसे त्याग देता है उस फल की खुशी और खुद को बोझ मुक्त के लिए……सामने वाले को आप कितना भी कुछ ना दे दें पर यदि वह तृप्त नहीं हुआ तो आपका देना या ना देना एक सा ही है,बात सबकुछ देने की नहीं है बात सिर्फ़ आत्मतृप्त की है एक वैरागी एक साधू के पास कुछ भी नहीं होता फिर भी उसे किसी बात का मलाल नहीं रहता क्योंकि उसकी आत्मा तृप्त होती है उसके पास जो भी कुछ होता है वह उसमे ही तृप्त रहता है, रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं आप सबकुछ देकर भी खुश नहीं हो और वह आपसे सबकुछ लेकर भी तृप्त नहीं,आप हर रोज हर पल खो रहे अपनी आत्मा की संतुष्टि को, सामने वाले को आप जबतक देते रहेगें
जब तक आपके पास है जब आप रिक्त हो जायेंगे धन-मन-प्रेम-समर्पन से तब आपको सामने वाला छोड़ हमेशा के लिए चला जाएगा और आप रह जायेगे रिक्त…..और वो घुटन जो आपको अपने रिश्ते में हर पल महसूस हो रहा था वही घुटन आपको एक वक्त के बाद आपके प्राण हर लेगी,,,जब भी आपको किसी भी रिश्ते में घुटन हो उन्हें त्याग दे…… केवल आत्मतृप्ती के लिए…… क्योंकि इस सृष्टि में आत्मतृप्ती का होना आवश्यक है किसी और की तृप्ति के लिए…!!!!!!

#ziddynidhi

पॉकेट एफ. एम. पर मेरी कहानी…..

मेरे द्वारा लिखी हुई कहानी को आप पॉकेट एफ. एम. पर सुन सकते हैं, इसके लिए आपको एक ऐप डाउनलोड करना होगा केवल, यदि आप कहानी सुनना पसंद करते हैं तो आप इसे जरूर डाऊनलोड करे क्योंकि इसमें बहुत सी कहानी है। मेरे द्वारा लिखी कहानी का नाम है “तुम बिन”,

लिंक ये है

https://pocketfm.app.link/OFaB9nYXC8

#ziddynidhi

न्यू साइट

दोस्तों यह मेरी नई साइट है, जो 2017 की साइट थी उसमें कुछ तकनीकी प्रोब्लेम हो गई है इस वजह से यह नई साइट मैंने बनाया है, उम्मीद है आप सभी फिर से मुझे प्यार देगें

मेरी पुरानी साइट का लिंक

https://ziddynidhi.wordpress.com

#ziddynidhi

कभी देखा है तुमनें अपराजिता को…..

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कभी तुमने देखा है
अपराजिता मंजरी को
देखना उन्हें तुम कभी….

कैसे दिखते वे गहरे नीले फूल
जैसे किसी ने उड़ेल दिये हों
खूब सारे गुलाल
खेलने फगुआ खातिर….

या मानो किसी बच्चे ने
रंग लिए हो अपने दोंनों हाथ…..
किसी ने इंद्रधनुष का नीला रंग….

तुम देखना कभी अपराजिता को
जब ओंस की कुछ बून्दे
बिखरी हों उनपर
या वारि की कुछ मोतियाँ
पड़ी रहे उन पर….

स्वयं को विस्मृण कर तुम
खो कर निहारना उन्हें
और महसूस करना
मखमली मंजरी को….!!!


#Ziddy

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